घर में काम करने वाली बहू को कोई नौकरी नहीं करने देना चाहता |
ममता की शादी को 8 साल हो चुके थे जब ममता की शादी हुई एमबीए कर रही थी और अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद जॉब करना चाहती थी, लेकिन ममता का परिवार बहुत बड़ा था यह पूरे परिवार वालों का काम करती और सब को खुश रखती कोई उसकी थोड़ी तारीफ कर दे बस उसी में खुश हो जाती उसने सारा काम अपने सिर पर उठा रखा मानो अगर वह नहीं होगी तो इस घर में कुछ होगा ही नहीं घर में काम करने वाली बहू को कोई नौकरी नहीं करने देना चाहता उसने भी सोचा कि मुझे भी नौकरी करनी चाहिए लेकिन
इसके पति हमेशा
मना
कर
देते
हैं
और
वह
चुपचाप
काम
में
लग
जाती
उसने
यह
बात
अपनी
सास
को
भी
कहीं
मुझे
नौकरी
करनी
है
तो
सास
ने
जवाब
दिया
क्या
कर
सकते
हैं
सूरज
मानता
तो
नहीं
फिर
भी
वह
चुपचाप
काम
में
लग
गई
|
अब ममता उदास
रहने
लगी
क्योंकि उसे
भी
अपने
पैरों
पर
खड़ा
होना
उसे
भी
कुछ
करना
था
लेकिन
ससुराल
में
कोई
नहीं
समझ
रहा
था
|
सबको बस काम चाहिए
एक
दिन
ममता
ने
अपनी
सच
कहा
मेरा
भी
बहुत
मन
करता
है
जॉब
करने
का
पर
घर
के
काम
के
चक्कर
में
नहीं
कर
पा
रही
हूं,
तभी
सास
ने
कहा
वैसे
तो
औरतों
का
तो
बस
इतना
ही
होता
है
अपना
घर
संभाल
ले
बच्चों
को
संभाल
ले
और
घर
पर
ही
सिलाई
कढ़ाई
का
काम
करें
| जॉब
औरतों
के
लिए
ठीक
नहीं
है
|
यह सुनकर ममता
चुप
हो
गई
और
कुछ
सोच
कर
अपनी
सास
बोली
मम्मी
जी
आप
नेहा
नंद
के
लिए
तो
आप
बहुत
परेशान
अगर
इसकी
जॉब
नहीं
लगी
तो
क्या
उसकी
सांस
पूरे
दिन
घर
में
ही
लगाए
रखेगी
और
पढ़ी-लिखी लड़की को
घर
में
ही
बैठना
पड़ेगा
फिर
ममता
की
सांस
में
उसकी
तो
साथ
है
ना
वह
उसके
बच्चों
को
संभाल
लेगी
फिर
ममता
ने
कहां
सास
तो
मेरी
भी
है
|
ममता की जेठानी भी जॉब
करती
है
और
उसके
देवर
की
शादी
अभी
नहीं
हुई
है
लेकिन
उसके
ससुराल
वाले
सोच
रहे
हैं
की
Govt. जॉब
वाली
बहू
लाएंगे
|
अब ममता को
बहुत
दुख
हुआ
कि
बस
क्या
वो
ही
औरत
है
वो
तीनों
जो
जॉब
कर
रही
है
वे
भी
तो
औरतें
है
ना
| ससुराल
बालों
ने
तो
बस
कामवाली समझ रखा
था
खत्म
हो
चुकी
थी|
अब
ममता
की
समझ
में
यह
बात
आ
चुकी
थी
कि
कोई
खुद
अपने
बारे
में
नहीं
सोचता,
तब
तक
दूसरा
कोई
किसी
के
बारे
में
सोचता
|
अब ममता ने अपने बारे मे सोचना शुरु किया और कुछ दिन बाद जॉब हासिल की| अब वह अपनी जॉब को, बच्चों को और घर को बहुत अच्छे संभाल रही है |


0 टिप्पणियाँ:
एक टिप्पणी भेजें
सदस्यता लें टिप्पणियाँ भेजें [Atom]
<< मुख्यपृष्ठ