सोमवार, 19 अक्टूबर 2020

बहु को बिना काम बताए सारे काम कैसे कराएं |



नेहा घर के सारे काम करती और सभी घरवालों का ध्यान रखती थी | किसी के काम को मना नहीं करती | लेकिन नेहा की सास उसे कुछ काम नहीं बताती | नेहा रसोई में कुछ काम कर रही थी तभी उसकी सास ने
आवाज दी सुमन(नेहा की नन्द )एक गिलास पानी लाना ,सुमन घर में थी ही नहीं नेहा ने जल्दी से सास को पानी दिया | अगले दिन सास ने कहा सुमन मेरे ये कपडे धोने थे सुमन ने अनसुना कर दिया क्युकी कपडे तो नेहा ही धोती थी | नेहा ने अपनी सास के कपडे धो दिए क्युकी कपडे तो वही धोती थी | ऐसे ही नेहा की सास को कुछ भी काम बताना हो तो नेहा को नहीं बताती सुमन का नाम ले कर काम कह देती चाहे सुमन हो या ना हो , (ऐसा लगता था जैसे उसकी नन्द और सास ने आपस में बात कर रखी हो , की मैं नाम तो सुमन तेरा ही लूगी लेकिन काम तुझे नहीं करना काम नेहा ही करेगी) नेहा को बहुत बुरा लगता लेकिन वो कुछ ना कहती सोचती शायद सुमन को ही बताया होगा उन्होंने सुना नहीं होगा यही बात सोच कर वह सारे काम करती रही | 

अब सुमन की शादी हो गयी और वो अपने ससुराल चली गयी | अब नेहा ने सोचा अब तो मम्मीजी अब तो मुझे  ही काम बताएंगी | बहुत अच्छा लगता है जब कोई आपको प्यार से काम बताये तो ऐसा मन होता सारे काम छोड़ कर पहले इनका ही काम करू | यह सोचते सोचते नेहा खाना बना रही थी और अपनी सास को खिला रही थी नेहा अपनी सास को एक एक रोटी देकर आ रही थी | अगर सास की रोटी खत्म हो जाती तो नेहा को आवाज नहीं लगाती और वेट करती की खुद ही दे जाए | सास खाना खा रही थी नेहा बना रही थी तभी नेहा की सास ने आवाज दी सुनील (नेहा का देवर ) एक गिलास पानी लाना | सुनील पानी ले आया | नेहा को बहुत बुरा लगा उसने सोचा मैं खाना खिला रही हूँ तो क्या पानी नहीं पिला सकती थी जो मुझे नहीं बोला | 

अब उसकी सास का रोज का यही काम हो गया सुनील का नाम लेकर ही काम बताती और कहती सुनील कपडे धुलवाने थे , सुनील भूख लग रही कुछ खाने का मन कर रहा है , सुनील यहाँ थोड़ा पोछा लग जाता तो ठीक रहता दुबारा गन्दा हो गया और सुनील सुनता भी नहीं था और नेहा सारे काम कर देती | ऐसे ही चलता रहा एक दिन नेहा की सास ने कहा सुनील आज मेरा रोटी खाने का मन नहीं कर रहा मैं तो खिचड़ी खाउंगी | 

| नेहा ने ये बात सुन ली थी लेकिन उसने अनसुनी कर दी और खाना दे दिया सास ने कहा रोटी , मैंने तो कहा था मैं खिचड़ी खाउंगी | तभी नेहा ने कहा मम्मीजी आपने कब कहा तो सास ने कहा मैंने कहा था सुनील को , नेहा ने कहा सुनील ने तो मुझे कुछ नहीं कहा | नेहा की सास ने कहा सुनील क्यों कहता तुझे सुनाई नहीं देता | नेहा ने कहा मम्मीजी खाना सुनील को बनाना है या मुझे, आपको मुझे बोलना चाहिए था तो नेहा की सास ने कहा मैं किसी को काम नहीं बताती | मेरे भांजे यहाँ कई सालो तक रहे मैंने कभी उन्हें कुछ काम नहीं बताया और वो कहते मामी जी आप कभी काम नहीं बताती |  

नेहा ने कहा मम्मीजी आप काम मुझे नहीं बताती और चाहती यह हैं कि काम मैं ही करू , और आप कब तक नहीं बताएँगे मैं यहाँ मेहमान नहीं हु कि कुछ दिनों मे चली जाउंगी | पूरी ज़िंदगी मैं यही रहूंगी और आपके काम ही  मैं ही करुँगी | फिर नेहा की सास को ये बात समझ आ गयी | 

बहुत सारी बहुओं के साथ ऐसा ही होता है जिनके साथ ऐसा हुआ है वो कमेंट करके बताये | 



बुधवार, 14 अक्टूबर 2020

आखिर बुढ़ापे मैं ही जीवनसाथी की अहमियत क्यूँ समझ आती है |

रामदास अकेला  बैठा बहुत  गहरी सोच मे डूबा हुआ था | उसकी शादी को 40 साल हो चुके थे आज वो बहुत  शर्मिंदगी महसूस कर रहा था | रामदास ने  अपनी  पत्नी सुमित्रा को कभी कोई मान सम्मान नहीं दिया न ही कभी उसकी खुशियों के बारे में  सोचा | बस अपने घरवालों को ही प्राथमिकता देता था |  माँ , बहन – भाई को ही सब कुछ मानता था |

सुमित्रा के साथ हमेशा मार पीट , गालियाँ देना बस यही सब | रामदास ने कभी नहीं सोचा कि अपने जीवनसाथी को अपनी लाइफ में क्या दर्जा देना चाहिए  | सुमित्रा चुप चाप ये सब सहती रही क्यूंकि उसने अपने बच्चों के बारे में सोचा, और वह अपनी फूटी किस्मत समझ कर अपनी ज़िंदगी काटने लगी |

अब शादी को 40  साल हो चुके थे | रामदास की  माँ मर चुकी थी बहनो की शादी हो चुकी थी भाई अलग हो चुके थे  बेटी की शादी हो चुकी थी बेटे-बहुएँ  जॉब में बिजी थे | अब रामदास के पास सुमित्रा के आलावा कोई सहारा ना था |

अब रामदास की हालत ऐसी थी कि वो अब अकेला नहीं रह सकता था और अकेला होता तो उसका मन घबरा जाता इसलिए सुमित्रा हमेशा रामदास के पास रहती थी कभी अकेला नहीं छोड़ती उसने अपना पत्नीधर्म अच्छे से निभाया | बुढ़ापे में हर इंसान को यही चाहिए कि कोई उनकी बात सुने उनके साथ बैठे |

बच्चे कितने भी अच्छे हो पर हर पल साथ नहीं हो सकते क्योकि उन्हें भी अपने बच्चों का भविष्य देखना अपने माँ – बाप की , बच्चों की जरूरते पूरी करनी होती है इसलिए ना बच्चे हमेशा साथ रहते है ना ही माँ-बाप जिंदगी भर साथ रहते हैं | ज़िंदगी भर का साथ तो बस जीवनसाथी ही दे सकता है |

अब 40 साल बाद रामदास को यह बात समझ आयी | अच्छा होता उसे यह बात पहले समझ आ जाती तो सुमित्रा को इतना सब ना सहना पड़ता | रामदास ने अपनी पत्नी से माफी मांगी और अपनी गलतियों का पश्चाताप किया , सुमित्रा कुछ पल के लिए कहीं खो गयी उसने सोचा अब बुढ़ापे में जाकर मुझे अपने जीवनसाथी  का साथ मिला है पूरी ज़िंदगी तो गालियाँ खाकर निकल गई |

लेकिन फिर भी सुमित्रा ने रामदास को माफ़ कर दिया और दोनों ने प्रण किया कि बची हुई ज़िंदगी को प्यार से बिताएंगे |  ज़िंदगी मैं हर रिश्ते की अलग अहमियत होती है| 

सभी शादी- शुदा लड़के और लड़कियों को टाइम रहते अपने जीवनसाथी की अहमियत को समझना चाहिए, इससे ज़िंदगी बहुत  प्यारी और आसान लगने लगती है | 

 

घर में काम करने वाली बहू को कोई नौकरी नहीं करने देना चाहता |

 

ममता की शादी को 8 साल हो चुके थे जब ममता की शादी हुई एमबीए कर रही थी और अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद  जॉब  करना चाहती थी, लेकिन ममता का परिवार बहुत बड़ा था यह पूरे परिवार वालों का काम करती और सब को खुश रखती  कोई उसकी थोड़ी तारीफ कर दे बस उसी में खुश हो जाती उसने सारा काम अपने सिर पर उठा रखा मानो अगर वह नहीं होगी तो इस घर में कुछ होगा ही नहीं घर में काम करने वाली बहू को कोई नौकरी नहीं करने देना चाहता उसने भी सोचा कि मुझे भी नौकरी करनी चाहिए लेकिन

इसके पति हमेशा मना कर देते हैं और वह चुपचाप काम में लग जाती उसने यह बात अपनी सास को भी कहीं मुझे नौकरी करनी है तो  सास  ने जवाब दिया क्या कर सकते हैं   सूरज मानता  तो नहीं फिर भी वह चुपचाप काम में लग गई |

अब ममता उदास रहने लगी क्योंकि उसे भी अपने पैरों पर खड़ा होना उसे भी कुछ करना था लेकिन ससुराल में कोई  नहीं समझ रहा था |

सबको बस  काम चाहिए  एक दिन ममता ने  अपनी सच कहा मेरा भी बहुत मन करता है जॉब करने का पर घर के काम के चक्कर में नहीं कर पा  रही  हूं, तभी  सास  ने कहा वैसे तो औरतों का तो बस इतना ही होता है अपना घर संभाल  ले बच्चों को संभाल ले और  घर पर ही सिलाई कढ़ाई का काम करें | जॉब औरतों के लिए  ठीक नहीं है

यह सुनकर ममता  चुप हो गई और कुछ सोच कर अपनी सास बोली मम्मी जी आप  नेहा नंद  के लिए  तो आप बहुत परेशान  अगर इसकी जॉब नहीं लगी तो  क्या उसकी सांस पूरे दिन घर में ही लगाए रखेगी और पढ़ी-लिखी लड़की को घर में ही बैठना  पड़ेगा फिर ममता  की सांस में उसकी तो साथ है ना वह उसके बच्चों को संभाल लेगी  फिर ममता ने  कहां  सास तो मेरी भी है |

ममता की   जेठानी  भी जॉब करती है  और उसके देवर की शादी  अभी नहीं हुई है लेकिन  उसके ससुराल वाले सोच रहे हैं  की Govt. जॉब वाली  बहू लाएंगे

अब ममता को बहुत दुख हुआ कि  बस  क्या वो  ही औरत है   वो तीनों  जो जॉब कर रही है वे भी तो  औरतें  है ना | ससुराल  बालों  ने तो बस  कामवाली  समझ रखा था  खत्म हो चुकी थी| अब ममता की समझ में यह बात चुकी थी कि कोई खुद अपने बारे में  नहीं सोचता, तब तक दूसरा कोई किसी के बारे में  सोचता |

अब ममता ने अपने बारे मे सोचना  शुरु किया और कुछ दिन बाद जॉब   हासिल  की| अब वह अपनी जॉब को, बच्चों को और घर को बहुत अच्छे संभाल रही है |